Tuesday, February 3, 2009

बगिया बगिया बालक भागे
तितली फिर भी हाथ न लागे
इस पगले को कौन बताये?
ढूँढ रहा है जो तू जग में
कोई जो पाए तो, मन में ही पाए

सपनो से भरे नैना...
तो नींद है न चैना

ऐसी डगर कोई अगर जो अपनाए
हर राह के वो अंत पे
रस्ता ही पाए
धुप का रस्ता जो पैर जलाये
मोड़ तो आए छाओं न आए
राही जो चलता है चलता ही जाए
कोई नहीं है जो कहीं उसे समझाए

सपनों से भरे नैना
तो नींद है न चैना

नैना रे नैना रे
नैना रे
नैना रे

घ घ प ध ...

दूर ही से, सागर जिसे, हर कोई माने
पानी है वो, या रेत है, यह कौन जाने
जैसे कि दिन से रैन अलग है
सुख़ है अलग और चैन अलग है
पर जो यह देखे वो नैन अलग है
चैन तो है अपना सुख़ हैं पराये

सपनों से भरे नैना
तो नींद है न चैना

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