Monday, October 27, 2008

Ghalib...

उनके देखे से जो आ जाती है मूह पर रौनक
वह समझते है कि बीमार का हाल अच्छा है !

देखिये पाते हैं उशाक बुतों से क्या फैज़
एक ब्राहमण ने कहा है कि ये साल अच्छा है

हमको मालूम है जन्नत की हकीक़त लेकिन
दिल के खुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है

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