कोई यह कैसे बताये कि वह तनहा क्यूँ है ?
वह जो अपना था वही और किसी का क्यूँ है ?
यही दुनिया है तो फ़िर ऐसी यह दुनिया क्यूँ है ?
यही होता है तो आख़िर यही होता क्यूँ है ?
एक ज़रा हाथ बढ़ा दे तो, पकड़ ले दामन
उसके सीने में समां जाए, हमारी धड़कन
इतनी क़ुर्बत है तो फ़िर फ़ासला इतना क्यूँ है ?
दिल-ऐ-बरबाद से निकला नही अब तक कोई,
एक लुटे घर पर दिया करता है दस्तक कोई,
आस जो टूट गई, फ़िर से बंधाता क्यूँ है ?
तुम मस्सर्रत का कहो या इसे ग़म का रिश्ता,
कहते हैं प्यार का रिश्ता है, जनम का रिश्ता,
है जनम का जो यह रिश्ता तो, बदलता क्यूँ है ?
वह जो अपना था वही और किसी का क्यूँ है ?
यही दुनिया है तो फ़िर ऐसी यह दुनिया क्यूँ है ?
यही होता है तो आख़िर यही होता क्यूँ है ?
एक ज़रा हाथ बढ़ा दे तो, पकड़ ले दामन
उसके सीने में समां जाए, हमारी धड़कन
इतनी क़ुर्बत है तो फ़िर फ़ासला इतना क्यूँ है ?
दिल-ऐ-बरबाद से निकला नही अब तक कोई,
एक लुटे घर पर दिया करता है दस्तक कोई,
आस जो टूट गई, फ़िर से बंधाता क्यूँ है ?
तुम मस्सर्रत का कहो या इसे ग़म का रिश्ता,
कहते हैं प्यार का रिश्ता है, जनम का रिश्ता,
है जनम का जो यह रिश्ता तो, बदलता क्यूँ है ?
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